रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।। विमोह जोगनामोह सर्व मोग्या था था थाह स्वाहा हे गौरी शंकरार्धांगिं! यथा त्वं शंकरप्रिया। ← वशीकरण करने के तरीके – वशीकरण के उपाय और टोटके – vasheekaran karane ke tareeke – vashikaran ke upay aur totake Even though it demands clarity of https://thomasp261zto0.topbloghub.com/profile